जीवन के सब सत्य दो और दो चार जैसे सरल है , सिर्फ़ असत्य कठिन होते हैं । असत्य को कठिन होना पड़ता है , क्योंकि अगर सत्य सरल होतो पकड़ में आजाएगा कि असत्य है असत्य को बहुत चालबाजियों के गोल घेरे में घूमना पड़ता है , ताकि यह पता न चल सके किवह असत्य है । सत्य सीधा और नग्न खड़ा हो जाता है । वह जैसा है वैसा ही परिडाम है । कोई मुह छुपाने , चेहरा बदलने कि ,कोई भी जरुरत नही होती है । इसलिए दुनिया में कठिन बातें कही गई है आमतौर से असत्य है । दुनिया में जीतनी सत्य बातें कही गई है वे आमतौर से सरल और सीधी है ।
अभिमन्यु के शब्दों में सच्चाई -
"सत्य कहता हूँ सखे सुकुमार मत जानो मुझे
यमराज से भी युद्ध में प्रस्तुत सदा मनो मुझे
है और कितो बात क्या गर्व मै करता नही
मामा तथा निज तात से समर में मै डरता नहीं "
Tuesday, August 4, 2009
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सच्चाई का कदम दर कदम साथ रखना ही जीवन की असली चुनौती है......
ReplyDeleteसत्य सीधा और नग्न खड़ा हो जाता है -these lines struck my attention..
ReplyDeletehttp://som-ras.blogspot.com
बहुत सही बात कही है सर....
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